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	<title>भारतीय सिक्के</title>
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		<title>10 रुपये का सिक्का 100,000 रुपये में !!</title>
		<description> भारतीय सिक्के अकसर मिश्र धातुओं के बनते हैं, लेकिन सन 2005 में पहली बार द्विधातु के 10 रुपये के सिक्के जारी किये गये जिनको शायद ही किसी ने देखा हो!! जितने सिक्के जारी किये गये थे वे सब के सब सिक्का-प्रेमी लोगों ने सीधे सरकार से खरीद लिये थे, ...</description>
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		<title>गोरे लुटेरों ने चलाया था इस पैसे को!!</title>
		<description> मुझे कई बार हंसी आती है जब लोग कहते हैं कि अंग्रेज शासक आये, इस कारण यह देश इसलिये सभ्य हुआ और हिन्दुस्तान में इस कारण अच्छी शिक्षा व्यवस्था का प्रादुर्भाव हुआ. यह वैसी ही बात है कि “अच्छा हुआ कि कल एक राहगीर लुट गया क्योंकि इस कारण ...</description>
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		<title>तीन पैसे के लिये सौ रुपये ठुके!!</title>
		<description> मेरे कई आलेखों में मैं ने अपने बचपन के पैसों के बारे में बताया था. इस पैसे का उपयोग कई वरिष्ठ चिट्ठाकारों ने अपने बचपन में किया था.&#160; जब 1964 मे सरकार ने इसे जारी किया तब यह आधा किलो टमाटर खरीदने के लिये पर्याप्त था और जब सस्ता ...</description>
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		<title>पैसे में छेद या छेद वाला पैसा??</title>
		<description>मेरे पिछले आलेख ताऊ जी, भाटिया जी, ज्ञान जी, सुब्रमनियन जी और …. और 2 पैसे की भी कोई कीमत है क्या? में बार बार छेद वाले एक पैसे की चर्चा हुई थी. आज अल्पना जी ने टिपियाया:     (alpana)कृपया छेद वाले सिक्कों के बारे में भी ...</description>
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		<title>2 पैसे की भी कोई कीमत है क्या?</title>
		<description> मेरे कल के आलेख ताऊ जी, भाटिया जी, ज्ञान जी, सुब्रमनियन जी और …. में मैं ने 2 आने का एक सिक्का दिखाया था जो हमारे बचपन में एक बहुत बडी राशि होती थी.&#160; इस पर समीर जी ने टिपियाया कि “दो आने की बात करने को करोड़ों के ...</description>
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		<title>लुप्त होती सिक्का-संपदा !</title>
		<description>   चित्र: अंग्रेजों के जमाने के एक प्रकार के दो भारतीय सिक्के, एक जिस हालत में मुझे ये सिक्के मिले उसको दिखाता है एवं दूसरा चित्र सिक्के की वैज्ञानिक विधि से सफाई करने के बाद का चित्र है. इस विषय पर मेरी पुस्तक 3 से 4 महीने में ...</description>
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		<title>पांच पैसे ने बचाई जान!</title>
		<description> सन 1961 की बात है ग्वालियर में बहुत सुविधाजनक सरकारी सिटीबस सेवा उपलब्ध थी और अधिकतर विद्यार्थी रियायती मासिक-पास पर यात्रा करते थे. लेकिन&#160; एक दिन हम तीन मित्रों ने बस छोड कर विद्यालय से घर पैदल जाना तय किया.&#160;   पाच किलोमीटर की दूरी, ग्वालियर की कडी ...</description>
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